पंजाब की बंद पड़ी फैक्ट्रियों के लिए बड़ी खबर, पुनर्जीवन और नवीनीकरण के लिए सरकार ने की ये घोषणाएं

बंद पड़े उद्योगों के पुनर्जीवन और उद्योगों के नवीनीकरण के लिए नई नीति स्वीकृत: सुंदर शाम अरोड़ा

डेली संवाद, चंडीगढ़

पंजाब सरकार द्वारा बंद पड़े उद्योगों के पुनर्जीवन और उद्योगों के नवीनीकरण के लिए नई नीति स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत कर्जदार कंपनियों और उद्यमियों को अपने बकाए का एक मुश्त निपटारा (ओ.टी.एस.) करने का अवसर मिलेगा। पंजाब के उद्योग और वाणिज्य मंत्री सुन्दर शाम अरोड़ा ने यह जानकारी दी।

मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार ने उद्यमियों और कर्जदार कंपनियों को पी.एस.आई.डी.सी और पी.एफ.सी. के साथ अपने बकाए के निपटारे का आखिरी अवसर देने के लिए एक मुश्त निपटारा नीति (ओ.टी.एस) को मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि भुगतान न करने वाली कंपनियों के लिए एक मुश्त निपटारे का यह आखिऱी अवसर होगा।

कर्जदार कंपनियों को अपने बकाए का एक मुश्त निपटारा करने का अवसर मिला

अरोड़ा ने बताया कि चेंबर ऑफ कॉमर्स और इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन के सुझावों और राज्य में उद्योग के पुनर्जीवन और पुर्नवास के प्रोमोटरों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद एक मुश्त निपटारा नीति-2018 को स्वीकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि इस नीति के अधीन उद्यमियों और कजऱ्दार कंपनियों को पंजाब राज्य उद्योग विकास निगम लिमिटेड (पी.एस.आई डी. सी) और पंजाब वित्त निगम (पी.एफ.सी) के साथ अपने बकाए के निपटारे के अंतर्गत क्रमवार 80-100 करोड़ और 7-10 करोड़ की वसूली प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

उद्योग और वाणिज्य मंत्री ने बताया कि नई नीति के साथ जहाँ रुकी हुई औद्योगिक संपत्ति को जारी करने के अलावा इन निगमों के साथ मुकद्मेबाज़ी में कमी लाने में भी मदद मिलेगी, वहीं इनकी विकास सरगर्मियों के लिए राजस्व भी जुटाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि पी.एस.आई.डी.सी ने 861 औद्योगिक इकाईयों को कजऱ् दिया था, जिनमें से 739 इकाईयों ने निगम के साथ पहले ही निपटारा कर लिया है जबकि सिर्फ 122 इकाईयों के मामले लम्बित हैं।

अरोड़ा ने आगे कहा कि पंजाब सरकार राज्य में उद्योगों के नवीनीकरण और पुनर्जीवन के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने इस नीति को स्वीकृत करने के बदले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह का धन्यवाद करते हुए कहा कि नई नीति के साथ जहाँ कजऱ्दार कंपनियों और उद्यमियों को प्रफुल्लित होने का मौका मिलेगा, वहीें नौजवानों के लिए रोजग़ार के मौके भी पैदा होंगे।

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