अली-बजरंगबली विवाद पर CM योगी ने चुनाव आयोग से कहा- दोबारा नहीं बोलूंगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अली-बजरंगबली विवाद पर अपना जबाव चुनाव आयोग को सौंप दिया है. अपने जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वह भविष्य में ऐसा बयान नहीं देंगे. यूपी सीएम ने चुनाव आयोग को भेजे जवाब में कहा कि वह भविष्य में ऐसा बयान देने से परहेज करेंगे।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 10 अप्रैल को मेरठ में एक चुनावी सभा में कहा था कि अगर अगर कांग्रेस-बीएसपी-एसपी को ‘अली’ पर विश्वास है तो उन्हें भी बजरंगबली पर विश्वास है. योगी आदित्यनाथ ने निर्वाचन आयोग से कहा कि अली-बजरंगबली वाले बयान पर उनकी मंशा गलत नहीं थी।

सीएम ने कहा कि आयोग के आपत्ति और नोटिस के बाद वह आयोग को विश्वास दिलाते हैं कि भविष्य में पूरा ध्यान रखेंगे. अब निर्वाचन आयोग तय करेगा कि वो योगी के इस जवाब से सन्तुष्ट है या नहीं. सीएम योगी आदित्यनाथ के इस बयान पर काफी हंगामा हुआ था और कांग्रेस, एसपी और बीएसपी ने उनके इस बयान की आलोचना की थी।

मायावती-अखिलेश की रैली से शुरू हुआ मामला

लोकसभा चुनाव 2019 में अली-बजरंगबली विवाद की एंट्री मेरठ में 10 अप्रैल से जरूर हुई, लेकिन इस विवाद का बैकग्राउंड यूपी के देवबंद में 7 अप्रैल को मायावती-अखिलेश और अजित सिंह की रैली से जुड़ा है. इस रैली में बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मुस्लिम मतदाताओं को आगाह करते हुए कहा कि किसी भी हालत में आपको अपना वोट बंटने नहीं देना है. मायावती ने कहा कि कांग्रेस इस हालत में नहीं है कि वो बीजेपी को चुनौती दे सके, जबकि महागठबंधन बीजेपी को जोरदार टक्कर देने की हालत में है, इसलिए मुसलमानों को अपना वोट बिखरने नहीं देना चाहिए.

मायावती के इस अपील की जवाब में यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने मेरठ में रैली में कहा कि महागठबंधन के नेता मुस्लिम वोटरों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए बाकी लोगों को सोचना चाहिए कि उन्हें किसके लिए वोट करना है.

मेरठ में योगी ने कहा था कि वेस्ट यूपी में मुस्लिम-दलितों का वोट आसानी से ट्रांसफर नहीं होगा. सीएम ने कहा कि बीजेपी को इससे फायदा होगा और पार्टी को बड़ी जीत मिलेगी

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